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Updated Sat, 15 May 2021 11:35 PM

वैक्सीन की कमी से सिर्फ 331 लोग ही हुए लाभांवित

जागरण संवाददाता, मऊ : जिले में शुक्रवार को टीकाकरण प्रतिदिन की अपेक्षा कम हुआ। सामान्य तौर पर चार दर्जन केंद्र पर आयोजित होने वाला टीका मात्र 11 केंद्र पर ही हुआ। इस दौरान 45 वर्ष से अधिक उम्र के 181 को पहली और 133 को दूसरी डोज दी गई। घोसी : स्थानीय तहसील के तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित संबंद्ध प्राथमिक अस्पतालों में से शुक्रवार को मात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोहरीघाट में ही एक सौ को टीके लगे। वैक्सीन की उपलब्धता न होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोसी पर एवं अन्य संबद्ध केंद्रों पर किसी को भी कोविड वैक्सीन नहीं लगी। दोहरीघाट प्रतिनिधि के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दोहरीघाट ब्लाक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ही वैक्सीन उपलब्ध रही। अन्य केंद्रों पर अनुपलब्धता के कारण दोहरीघाट में वैक्सीन के लिए सुबह दस बजे ही लोगों की भीड़ जुट गई। मात्र एक सौ को वैक्सीन लगाए जाने के बाद वैक्सीन का स्टाक समाप्त हो गया। इसके चलते अन्य वापस होने को विवश रहे। बोझी प्रतिनिधि के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़रांव सहित किसी भी केंद्र पर वैकसीन उपलब्ध न रही।

सम्मान निधि की किस्त मिली, गदगद हुए अन्नदाता

जागरण संवाददाता, घोसी (मऊ) : केंद्र सरकार ने गरीब अन्नदाताओं के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि लागू कर खाद एवं बीज की व्यवस्था को कुछ आसान कर दिया है। इन दिनों अन्नदाता धान की नर्सरी की तैयारी कर रहे हैं या तो शीघ्र ही तैयारी में जुट जाएंगे। ऐसे में केंद्र सरकार ने निधि की एक किस्त प्रेषित कर किसानों की आर्थिक समस्या को सुलझा दिया है। दरअसल इस वर्ष गेहूं की खरीद विलंबित चल रही है। जिन किसानों ने गेहूं बेच दिया है, उनको भुगतान नहीं मिला है। जिन किसानों ने बाजार में गेहूं बेचा है, उनके उत्पाद का भी पूरा भुगतान न मिल सका है। उधर किसान अब धान की बेहन डालने को खेत तैयार कर रहा है। खेत तैयार होने के पूर्व ही बीज एवं सिचाई की व्यवस्था करना है। आर्थिक संकट से जूझ रहे अन्नदाताओं के खाते में आवश्यकता के वक्त सम्मान निधि प्रेषित कर केंद्र सरकार ने गदगद कर दिया है।

सरयू की कटान में विलीन हो गए तमाम धार्मिक धरोहर

जागरण संवाददाता, मऊ : भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या के बाद देश में दोहरीघाट का ऐतिहासिक महत्व है। दोनों धार्मिक स्थानों पर सरयू नदी पश्चिम से पूरब की तरफ, फिर उत्तर की तरफ होते हुए पूरब की ओर बहती है। यही नहीं धार्मिक दृष्टिकोण से भी यहां का मुक्तिधाम (श्मशानघाट) काशी क्षेत्र में आता है। इससे इसका धार्मिक महत्व काफी बढ़ जाता है। यही वजह है कि मऊ जनपद का दोहरीघाट की धार्मिक धरोहरों में गिनती होती है। हालांकि सरयू की प्रलयंकारी विभीषिका की वजह से यहां के तमाम सामाजिक और धार्मिक धरोहर नदी की धारा में कट कर विलीन हो गए। यहीं नहीं यहां के किसानों की हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि भी सरयू की धारा में समा चुकी है।